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क्रांति दिवस पर कैंडल जलाकर प्रखंड कार्यालय परिसर के शिलालेख में अंकित 55 स्वतंत्रता सेनानियों को दी गई श्रद्धांजलि


Bihar News : Nawada : भारतमाता को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने में अपना सर्वस्व गंवा देने वाले  वारिसलीगंज प्रखंड के 55 स्वतंत्रता सेनानियों को  शनिवार की सायं क्रांति दिवस के अवसर पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई. प्रखंड कार्यालय परिसर में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम अंकित शिलापट्ट के समीप आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ प्रशासनिक अधिकारियों ने कैंडल जलाकर वीर सपूतों को नमन किया.

वारिसलीगंज प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों एवं बाजार के 55 स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ चलाए गए स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी. वर्ष 1942 से 1947 के बीच आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के कारण अंग्रेजी शासन द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया तथा कई प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक यातनाएं दी गईं. बावजूद इसके स्वतंत्रता सेनानियों ने हिम्मत नहीं हारी और देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के संघर्ष में डटे रहे.

आजादी के बाद देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इन वीर क्रांतिकारियों को भारत सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देकर सम्मानित किया गया. इन वीर सपूतों की स्मृति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में प्रखंड क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों के प्रयास से वारिसलीगंज प्रखंड परिसर में सभी 55 सेनानियों के नाम अंकित शिलापट्ट स्थापित कराया गया था.

प्रत्येक वर्ष क्रांति दिवस के अवसर पर क्षेत्रवासी शिलापट्ट के समीप पहुंचकर अपने उन पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन संघर्ष में लगा दिया. शनिवार की शाम करीब छह बजे शिलापट्ट स्थल को कैंडल से सजाया गया. इसके बाद उपस्थित लोगों ने एक-एक कर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया.

कार्यक्रम में बीडीओ अमित कुमार, थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी, शिक्षाविद डॉ. गोविंद जी तिवारी, मुखिया राजकुमार सिंह, अरुणंजय मेहता, मुखिया प्रतिनिधि सह पंसस राहुल कुमार, पप्पू चौधरी, सुरेंद्र यादव समेत कई स्थानीय पत्रकार मौजूद रहे.

शहीदों की कुर्बानी को याद रखना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी:

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज हम जिस आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग, संघर्ष और बलिदान है. उनकी कुर्बानियों को केवल विशेष दिवस तक सीमित न रखकर नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है. स्वतंत्रता सेनानियों के नाम अंकित यह शिलापट्ट आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, त्याग और संघर्ष की प्रेरणा देता रहेगा. 

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