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सिंचाई संकट के स्थायी समाधान के लिए Gangajal गंगाजल की तरह Kosi कोसी नदी के फालतू पानी को नालंदा, नवादा तथा गया जिलों में लाने की उठी मांग


• कोसी का पानी आने से बढ़ेगा फसल चक्र

• बढ़ेगा कृषि उत्पादन तो किसान होंगे आत्मनिर्भर 

• कोसी के तांडव पर होगा नियंत्रण


Bihar में जिस तरह Ganga नदी के जल को पीने के लिए Magadh की ऐतिहासिक राजधानी Rajgir, महात्मा Buddha की ज्ञान भूमि Bodhgaya और मोक्षभूमि Gaya के हर घर में आपूर्ति की जा रही है, नवादा के घरों में गंगाजल आपूर्ति की तैयारी युद्ध स्तर पर की जा रही है, ठीक उसी तरह कोसी के फालतू पानी को खेतों की सिंचाई के लिए Nalanda, Nawada तथा Gaya के गांवों को उपलब्ध करायी जाय तो फसल चक्र बढ़ने के साथ ही इन जिलों के किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं.



तांडव होगा कम, शोक की जगह वह वरदान भी बन सकती है:


Kosi के पानी का विभाजन होने से जब उसका तांडव कम होगा तब शोक की जगह वह वरदान की नदी भी बन सकती है. नालंदा के किसान नेता जगलाल चौधरी, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास अध्यक्ष नीरज कुमार, प्रकृति अध्यक्ष नवेन्दू झा, सचिव राम विलास तथा सोशल एक्टिविस्ट एडवोकेट चंद्रमौलि शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भागीरथी प्रयास से पर्यटन स्थल राजगीर, बोधगया और गया के हर घर में गंगाजल की आपूर्ति की जा रही है. जबकि नवादा में भी गंगाजल पहुंचाने की तैयारी अंतिम दौर में है.



राजगीर, बोधगया आदि जगहों में गंगाजल आपूर्ति होने से मानव, अतिथि, पर्यटक के अलावा वहां के पशु-पक्षी भी गंगाजल पी कर निहाल हो रहे हैं. सरकार द्वारा अब राजगीर Safari के जंगली वन्य प्राणियों और आकाशीय विचरण करने वाले प्राणियों को भी गंगाजल पिलाने की तैयारी की जा रही है. दुनिया के अलग- अलग देशों से Nalanda University में पढ़ रहे शिक्षार्थियों को गंगाजल पिलाने की सरकारी मुहिम तेज है. Bihar Police Academy और CRPF training centre में भी गंगाजल आपूर्ति की कवायद की जा रही है जहां प्रशिक्षुओं को भी गंगाजल पीने का अवसर मिलेगा. नागरिकों की मानें तो बिहार सरकार द्वारा शहर में बढ़ते जल संकट पर नियंत्रण और भूमिगत जल दोहन रोकने के लिए यह पहल किया गया है.


Nitish government द्वारा पेय जल संकट दूर किया गया है:



Nitish government द्वारा जिस तरह पेय जल संकट दूर किया गया है, उसी तरह सिंचाई संकट को समाप्त करने के लिए मिथिला की कोसी नदी का पानी मगध क्षेत्र के नालंदा, नवादा और गया में आपूर्ति किये जाने की मांग उठ रही है. नीरज, नवेन्दू, जगलाल, रामबिलास तथा चंद्रमौलि ने कहा कि कोसी नदी उत्तर बिहार के लिए शोक की नदी कही जाती है. कोसी का बाढ़ और फालतू पानी को नालंदा, नवादा तथा गया की नदियों, झीलों और बड़े जलाशयों में जमाकर सिंचाई के उपयोग में लाया जाय तो इन जिलों के गावों का फसल चक्र बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है. 


नालंदा, नवादा तथा गया फिर से धान का कटोरा हो सकता है:




सिंचाई का पर्याप्त साधन होने से नालंदा, नवादा तथा गया फिर से धान का कटोरा तो हो ही सकता है, धान, गेहूँ, सब्जी आदि उत्पादन में भी पहले से बड़ा रिकॉर्ड बना सकता है. यहां के किसानों का मानना है कि गंगाजल को पीने लायक बनाने के लिए सरकार को करोड़ों की मशीन लगानी पड़ी है जबकि कोसी के फालतू पानी को केवल लिफ्ट कर पाइप से इन स्थानों पर लाकर उपयोग में लाया जा सकता है. इससे कोसी के तांडव पर नियंत्रण के साथ-साथ नालंदा, नवादा और गया के गांवों को सिंचाई संकट का स्थायी समाधान मिल सकता है.




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