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सैंकड़ों वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्याधाम में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण होना सनातन धर्म व संस्कृति के उदय का प्रतीक - जगद्गुरु स्वामी संत अनुरागी जी महाराज


Bihar News : Nawada : बिहार प्रदेश अन्तर्गत मगध प्रमंडल के नवादा जिला के वारिसलीगंज प्रखंड सह नगर परिषद् मुख्यालय स्थित अधिवक्ता व पत्रकार चंद्रमौलि शर्मा के आवास पर उत्तर प्रदेश की श्रीराम नगरी श्रीअयोध्याधाम के पतित पावनी माँ सरयू के ऋणमोचन घाट के परिक्रमा मार्ग के श्री संत गोपाल मण्डपम् से पधारे श्रीमजगद्‌गुरु रामानुजाचार्य श्री श्री 1008 श्री स्वामी अनुरागी जी महाराज उर्फ अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने गुरुवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि मैंने क्रान्तिकारी, ज्ञान व मोक्ष की भूमि तथा वैष्णव सम्प्रदाय के विश्ववि‌द्यालय के रूप में ख्याति प्राप्त अपषढ़ तथा पार्वती  पहाड़ की इंद्रसाल गुफा सहित मगध भूमि में जो मैंने ऊर्जा देखी है, उससे मैं अभिभूत हूँ.

स्वामी जी ने वारिसलीगंज की पावन धरा को नमन करते हुए कहा कि मैं इस क्षेत्रवासियों की आरोग्यता सम्पन्नता, शान्ति, सद्‌भाव, समृद्धि तथा सनातन संस्कृति की पुनस्थापना हेतु जागरण को आया हूँ. उन्होनें तमाम भेदभावों, अंधविश्वासों, जटिल कर्मकाण्डों के संबंध में बात करते हुए कहा कि "किर्णवंतो विश्वमार्यम्" तथा "वसुधैव कुटुम्बकम्" के साथ अनेकता में एकता, सनातन संस्कृति की विशेषता रही है.

स्वामी जी ने कहा कि अपनी संतति को संस्कृति, धर्म सम्प्रदाय, राष्ट्र प्रेम, भाईचारा, सद्‌भाव तथा जगत कल्याण के लिए मेरे जैसे आज हजारों संत महात्मा अपने मठ - मन्दिर  से निकलकर सुदूर गाँव में जन जागरण अभियान पर निकल पड़े हैं. उन्होनें विश्व के करोड़ों सनातन धर्माबलाबियों के रोम-रोम में बसे मयादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर 76 युद्ध, 500 वर्षों तक संघर्ष तथा सैकड़ों वर्षों की नाहक कानूनी पचड़ों के बाद भव्य व दिव्य श्रीराम मन्दिर का निर्माण होना सनातन धर्म व संस्कृति की उदय का प्रतीक है.

उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम, मैया जानकी सहित श्री हनुमान जी का स्मरण करते हुए हम सब इस क्षेत्र में शीघ्र ही मनोकामनापूर्ण महायज्ञ के सफल आयोजन की प्रार्थना करें. मौके पर स्वामी जी के सहायक स्वामी अनिरुद्ध दास उर्फ अनुज जी महाराज समेत वारिसलीगंज क्षेत्र के कई गणमान्य शिक्षाविद, कानूनविद, समाज के विभिन्न विधाओं के लब्ध प्रतिष्ठ भक्तगण शामिल थे. स्वामी जी ने उपस्थित भक्तों को अपने हाथों से प्रसाद व अंगवस्त्र देकर आशीवाद दिया.







                   

                               - चंद्रमौलि शर्मा.










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