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संतान की रक्षा का पर्व जितिया व्रत 14 सितंबर को, 13 सितंबर को होगा नहाय-खाय, व्रतियों में गजब का उत्साह

Bihar News : जितिया व्रत इस वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाएगा. संतान की रक्षा के व्रत पर जीवित्पुत्रिका पूजन करने के लिए व्रती माताएं अखंड निर्जला उपवास रखेंगी.

इससे पूर्व 13 सितम्बर को नहाय-खाय होगा. व्रत के अगले दिन 15 सितम्बर की सुबह पारण कर सभी व्रती उपवास का समापन करेंगी. व्रतियों में अभी से ही व्रत की तैयारी की उत्सुकता देखी जा रही है. 

शुभ मुहूर्त में पूजन को लेकर व्रत रखने वाली महिलाएं अभी से ही पूछताछ करने लगी हैं. संतान प्राप्ति की कामना के लिए जितिया व्रत करने से सभी दु:ख खत्म होने की मान्यता है, जिसको ले व्रती माताएं अभी से ही सारी तैयारियों को अंजाम दे रही हैं.

जितिया व्रत के दिन भगवान जीमूतवाहन की पूजा का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा-पाठ करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है. साथ ही, संतान की बरकत होती है. ऐसे में सभी माताएं पूर्ण निष्ठा से पूजन को लेकर शुद्धता और सात्विकता के साथ अपनी तैयारी कर रही हैं. गले में पहनने वाली जितिया का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि पूर्व के जितिया का सूत्र आदि भी बदलवाया जा रहा है.

यह व्रत मुख्यत: आश्विन माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी चंद्रोदय व्यापनी में होता है, जो 14 सितम्बर को मिल रहा है. इस बार अष्टमी तिथि का प्रारम्भ 14 सितंबर को 05:04 बजे सुबह होगा और इसका समापन 15 सितंबर को सुबह 03:06 बजे होगा. शास्त्रों में उदयातिथि का विशेष महत्व बताया गया है.

इसी कारण माताएं 14 सितंबर को सूर्योदय से पहले कुछ खाकर-पानी पीकर यानि सरगही कर तैयार हो जाएंगी और फिर सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक निर्जला व्रत का पालन करेंगी. इसका पारण नवमी तिथि को होना चाहिए, जो 15 सितम्बर को प्रात: 06:27 बजे के बाद मिल रहा है, जो दूध से होगा.

जितिया व्रत को माना जाता है बेहद महत्वपूर्ण :-

जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं, इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए कठिन व्रत रखती हैं. जितिया व्रत का पालन निर्जला रहकर किया जाता है. संतान की दीर्घायु के लिए भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना का विधान है. जितिया व्रत में जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व है.

जीमूतवाहन, गंधर्व राजकुमार थे जिन्होंने एक नागिन के पुत्र को बचाने के लिए खुद को गरुड़ को अर्पित कर दिया था. इनकी प्रतिमा बनाकर पूजा करने से संतान की रक्षा होती है और संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है. इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है. महिलाएं पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर कथा सुनती हैं और पेड़ की परिक्रमा करती हैं.

पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है, जिससे सभी दुख दूर होते हैं. जितिया व्रत के दिन इसकी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें. इस कथा में जीमूतवाहन की कहानी है. कथा सुनने से व्रत का पूरा फल मिलता है और सभी दु:ख दूर होते हैं. 

व्रत के पारण के बाद गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्रों का दान करें. ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा का बड़ा महत्व है. ऐसे में जितिया व्रत के दौरान उनका विधिवत अभिषेक करें और ऐसा करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है.

                                              - चंद्रमौलि शर्मा.

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