Header Ads

Breaking News

Bharat भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने में Nalanda University  की भूमिका होगी अहम : शौर्य डोभाल

 



• G 20 यूनिवर्सिटी कनेक्ट: एंगेजिंग यंग माइंड्स विषयक परिचर्चा में जुटे देश-विदेश के कई नामचीन विद्वान एवं पूर्व राजदूत.

• वसुधैव कुटुंबकम की विचारों का प्रतिनिधितत्व करता है नालंदा:  प्रो. सुनैना सिह.


G 20 सम्मिट समूह को लेकर Bihar में पहली संगोष्ठी का आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय Rajgir के सुषमा स्वराज ऑडिटोरियम में में किया गया. इस कार्यक्रम में भारत और विदेशों के नामचीन विद्वानों और राजनयिकों ने भाग लिया. यूनिवर्सिटी कनेक्ट: एंगेजिंग यंग माइंड्स’ विषयक व्याख्यान कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुनैना सिंह ने कहा कि प्राचीन भारतीय आदर्श को साकार करना तथा वैश्विक एकता कायम रखना भारत की प्रथम प्राथमिकता है. परिवर्तनशील विश्व में वसुधैव कुटुम्बकम का नारा सर्वोपरि है. भारत की अध्यक्षता में G 20 के 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' के आदर्श-वाक्य में सब कुछ सन्निहित है. उन्होंने कहा कि एक तरफ दुनिया के कई देशों में आर्थिक विकास दर में गिरावट हो रही है वहीं दूसरी तरफ भारत अपने साक्षरता और सकल घरेलू उत्पाद के विकास दर में प्रगति कर रहा है. सौ से अधिक यूनिकॉर्न बनाने वाले युवा उद्यमियों के साथ भारत सॉफ्टवेयर पावर के रूप में भी उभरा है. कुलपति ने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के पांच-सूत्री सिद्धांत, जिन्हें  'पंचामृत' कहा जाता है, आज के समय में सर्वाधिक प्रासंगिक है. 


पूर्व राजदूत और Sushant University के अंतर्राष्ट्रीय संबंध निदेशक जे.एस. मुकुल ने G 20 सम्मिट में भारत की अध्यक्षता के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने G 20 फोरम में भारत के प्रभुत्व और वर्तमान अध्यक्षता के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि दक्षिण-देशों के वैश्विक स्तर पर प्रतिनिधि के रूप में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है. नालंदा विश्वविद्यालय के ज्ञान-सर्जन परंपरा को विकसित करने का बड़ा महत्व है. 



व्याख्यान बाद आयोजित परिचर्चा में भारत की G 20 समूह की अध्यक्षता के दौरान आई.बी.एस.ए सहयोग को मजबूत करने के विषय पर विचार किया गया है. मुख्य वक्ता पूर्व राजदूत वीरेंद्र गुप्ता ने Bharat, Brazil और South Africa के पारस्परिक संबंध को निकट लाने में आई.बी.एस.ए की अहम भूमिका के बारे में विस्तार से बताया. ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और भारत के अन्य विशेषज्ञों ने इस संबंध में अपने शोधपूर्ण पक्ष रखे.


सदियों से नालंदा एशियाई ज्ञान का प्रतीक रहा है. विश्वविद्यालय अपने नए अवतार में एक बार फिर इसी तरह की यात्रा शुरू करने के लिए तैयार हो रहा है. वर्तमान कुलपति के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में कई नए पहल  किये गए हैं जो नालंदा की नींव को सुदृढ़ कर रहे हैं. G 20 यूनिवर्सिटी कनेक्ट प्रोग्राम की पहल से नालंदा के छात्रों को वैश्विक नीतियों की समझ को विकसित करने और वर्तमान संदर्भ में उभरती चुनौतियों का अध्ययन करने में मदद मिलेगी. इस अवसर पर वक्ताओं और नालंदा विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच प्रश्नोत्तर किया गया. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, प्रशासनिक पदाधिकारी, शोधार्थी और देशी- विदेशी छात्र उपस्थित थे.


भारत भविष्य में वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार - शौर्य डोभाल.



युवा अर्थशास्त्री, उद्योग रत्न पुरस्कार विजेता और इंडिया फाउंडेशन के निदेशक शौर्य डोभाल ने कहा कि भारत भविष्य में वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है. भारत को फिर से विश्वगुरु के रूप में पुनर्स्थापित करने में नालंदा विश्वविद्यालय की प्रमुख भूमिका होगी. उन्होंने कहा कि


हमारा लक्ष्य अगले 25 वर्षों तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हासिल करना है. पिछले 10 वर्षों की प्रगति इस स्थिति के लिए आश्वस्त करती है. भारत की संपन्नता से कई देशों को लाभ होगा. विश्व के करीब 40 फीसदी आबादी और युवा इसके प्रत्यक्ष लाभार्थी होंगे. उन्होंने कहा कि हमें औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर होकर आत्मविश्वास के साथ उभरना है. डोभाल ने कहा कि नालंदा परंपरा दुनिया को स्वदेशी विचारों के साथ एक वैकल्पिक, सामाजिक, आर्थिक मॉडल प्रदान कर सकता है. आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय को मानवता, प्रगति और सुरक्षित दुनिया के प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रतिष्ठापित करना होगा.




No comments