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सावन मास बहे पुरबइया, बेचहु बरदा, किनहु गइया, जुलाई में अबतक 261 मिमीके विरुद्ध 235 मिमी हुई बारिश, किसान चिंतित


कृषि पंडित घाघ कहते हैं - "सावन माह बहे पुरबइया, बेचहु बरदा, किनहु गइया." यानि कि सावन माह में अगर पुरवाई हवा चले तो बर्षा की आस छोड़ दें. आगे कहते हैं - "सावन पछुआ महि भरे, भादो पुरवा का दो सड़े." "आश्विन में जो चले ईशान, कार्तिक में सिक न डोले, कहां धान रखबा हो किसान." फिलहाल स्थिति विपरीत है. पिछले तीन वर्षों से जिले के किसान अकाल का सामना कर रहे हैं. इस वर्ष भी अब तक स्थिति अच्छी नहीं है.

Nawada जिले में अषाढ़ मास की समाप्ति तथा श्रावण माह के चार दिन गुजरने के बावजूद किसान आसमान की ओर टकटकी लगाये हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. ऐसा अबतक पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होने तथा भूगर्भीय जलस्तर में बृद्धि नहीं होने के कारण हो रहा है.

जिले में सामान्य बर्षापात 261.60 mm के विरुद्ध वास्तविक वर्षापात 235.5mm दर्ज की गयी है. फसल अच्छादन अंतर्गत धान बिचड़े का शत प्रतिशत आच्छादन कर लिया गया है. धान रोपनी 1132 हेक्टेयर में, मक्का 588.46 हे०, मडुवा 137.8 हे०, दलहन 871.34 हे०, तेलहन 173.27 हेक्टेयर में आच्छादन हो चुका है एवं आच्छादन जारी है.

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत लाभुक किसान का भौतिक सत्यापन एवं ई केवाईसी किया जा रहा है. कृषि यंत्रीकरण योजना के अंतर्गत 637 कृषि यंत्रों का स्वीकृति आदेश जारी किया गया है जिसमें 382 किसानों के द्वारा यंत्र का क्रय किया जा चुका है.

जिले में कुल 13100 मिट्टी के नमूने की जांच की जानी  है. जिसके विरुद्ध 3060 मिट्टी नमूने की जांच की  जा चुकी है. शेष नमूनों का विश्लेषण जारी है तथा यह सितंबर माह तक पूर्ण हो जाएगा. आकांक्षी प्रखंड अंतर्गत  काशीचक एवं पकरीबरमा में 1489 मिट्टी के नमूने जांच किये जाने थे जो शत प्रतिशत पूर्ण हो चुका है और किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करा दिया गया है.

उद्यान विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि सोमवार से आम और केले के पौधों का लक्ष्य के अनुसार आवेदक किसानों के बीच वितरण किया जाएगा एवं जिले में पहली बार 800 नारियल के पौधों का वितरण करने का लक्ष्य है जिसके लिए आवेदन लिया जा रहा है . 

पौधा संरक्षण अंतर्गत 42 पौध संरक्षण पाठशाला चलाने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है. इसे संचालित करने हेतु किसानों का चयन किया जा रहा है. फिलहाल पुरवा हवा चलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में बारिश के अभाव में कृषि कार्य ठप है जिसके चलते किसान बहुत चिंतित हैं.

                                          - रविंद्रनाथ भैया.

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